| अध्यक्षीय परिचय |
डॉ. गजानन डांगे सामाजिक शोधकर्ता, लेखक और नेतृत्व विकास प्रशिक्षण के आधार स्तम्भ हैं। भारतीय विकास चिंतन को आधारभूत रखते हुए ग्रामीण तथा जनजातीय क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधन आधारित आजीविका निर्माण विषय में देश के प्रमुख विचारकों में से एक हैं।
नंदुरबार जिले के कृषि विज्ञान केंद्र को डांगे जी ने दस वर्षों के कार्यकाल में उन्हों ने एक विशिष्ठ धरातल प्रदान किया। इस केंद्र में हुए प्रयोग और परियोजनाओं को राष्ट्रिय स्तर पर सराहा गया। उन के मार्गदर्शन में इस केंद्र के विकासशील किसानों को राष्ट्रिय स्तर पर अनेक पुरुस्कार प्राप्त हुए हैं। उन के मार्गदर्शन में नंदुरबार जिले की खांडबारा परिसर विकास परियोजना को राष्ट्रिय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।
NABARD, ICAR, DST, UNDP-SGP, WORLD BANK आदि अग्रगण्य संस्थाओं के साथ मिलकर परियोजनाओं के सफल कार्यान्वयन में उन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

डॉ. गजानन डांगे
डांगे जी ने देश-प्रदेश की विविध योजनाओं के लिए नीतिगत सहयोग दिया है। महाराष्ट्र के संतुलित विकास के लिए गठित केलकर समिति द्वारा कृषि, वन, एवं पशु संवर्धन के लिए गठित उपसमिति के वे सदस्य रहे हैं। भारत के अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम की अगुआई में तैयार किये गए “जनजाति नीति दृष्टि पथ २०२०” के लिए उन्हों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है।
डांगे जी एक अध्यनशील व्यक्तित्व के धनी हैं। विगत २५ वर्षों से वे ग्राम विकास क्षेत्र में अध्ययनरत हैं। कृषि विषयक भारतीय विकास चिंतन के क्षेत्र में अध्ययन एवं संशोधन के लिए उन को जाना जाता है। भारत के विविध गाँवों में विकास विषयक प्रश्नों का उन्हों ने तार्किक अध्ययन किया है। इन समस्त प्रश्नों के समाधान के लिए, विकासशील किसान, सामाजिक संस्थाएं तथा प्रशासन प्रतिनिधियों को एक व्यासपीठ देने का सराहनीय कार्य उन्हों ने किया है। विकास की प्रक्रिया में परंपरागत ज्ञान के स्थान को ध्यान में रखते हुए, परंपरागत ज्ञान निर्मिति प्रक्रिया के लिए अभिलेखन एवं व्यवहारिक प्रयोगों के क्रियान्वयन में उन की महत्वपूर्ण भूमिका है। भारतीय जनताति क्षेत्रों के विकास विषयक विद्यमान परिस्थिति का उन्हों ने बहुत गहराई से अध्ययन किया है। उन की प्रेरणा से ही ऐसे ३६ जनजातीय क्षेत्रों में सहयोगी अध्ययन प्रक्रिया का आरम्भ हो सका है।
भारत में विकास, प्राकृतिक संसाधन, लोग, परम्पराएं, लोगों का ज्ञान तथा आधुनिक विज्ञान इन सब को समझते हुए धरातल पर विकास प्रकिया को आगे बढ़ाने वाले नेतृत्व की आवश्यकता को उन्हों ने समझा। ग्रामीण जनजाति क्षेत्रो के युवाओ में इस प्रकार के नेतृत्व गुणों को सुस्थापित करने हेतु योजक की स्थापना डांगे जी ने की। इसके माध्यम से आज 11 राज्यों में जनजाति क्षेत्र में कार्यरत स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाएं, सामाजिक नेतृत्व तथा संघटनो के साथ योजक कार्यरत है। महात्मा गाँधी, आचार्य विनोबा भावे, राष्ट्र संत तुकडोजी महाराज, पंडित दीनदयाल उपाध्याय के दिखाये भारतीय विकास चिंतन की राह पर योजक अपने सहकारी संस्थाओं के साथ मार्गक्रमण कर रहा है।
भारत में कृषि विषयक भारतीय चिंतन के आधार पर समाज निति एवं शासकीय निति निर्धारण में सहयोग के लिए गठित “अक्षय कृषि परिवार” इस राष्ट्रिय स्तर की संस्था के निर्माण में डांगे जी ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके माध्यम से सीमांत किसानों के भारतीय पारम्पारिक कृषि हेतु विशेष कार्यक्रम बनाने के लिए निति आयोग के साथ साझा प्रयास चल रहे हैं।
भारतीय गोवंश संवर्धन के क्षेत्र में डांगे जी द्वारा क्रियान्वयित प्रयोगों एवं अध्ययन का विशेष स्थान है। उन की प्रेरणा से वर्धा जिले में गवलव नामक विशिष्ट गोवंश के संवर्धन का कार्य गोपालक, पशु वैज्ञानिक एवं समाज सेवी संस्थाओं के माध्यम से चल रहा है। इस विषय को समर्पित ट्रस्ट का गठन स्थानीय लोगों ने किया है।
जैवविविधता दस्तावेजीकरण की प्रकिया जैवविविधता कानून २००२ के परिपेक्ष्य में भारत के विभिन्न स्थानों पर चल रही है। यह एक बहुत वैज्ञानिक प्रक्रिया है। इस में स्थानीय समाज को किस तरह सम्मिलित किया जाए इस हेतु डॉ. डांगे जी ने नंदुरबार में अनेक प्रयोग किये। इन प्रयोगों के आधार पर पारम्परिक उत्सवों की भारतीय परम्परा को विज्ञान के साथ जोड़ते हुए उन्होंने वन सब्जी उत्सव, बीज पूजन उत्सव, वन पूजन उत्सव आरंभ किये। भारतीय समाज की उत्सव प्रियता को दस्तावेजीकरण की जटिल प्रकिया के साथ जोड़कर उन्हों ने समाज के साथ काम करने की नयी निति का निर्धारण किया। इसके माध्यम से नंदुरबार के सातपुडा की जनजाति महिलओं के वन सब्जी से जुड़े ज्ञान का अभिलेखन हुआ। इसके साथ नंदुरबार के पारम्पारिक फसलों की जानकारी एकत्रित हुई। आज भारत के विभिन्न राज्यों में इस पद्धति का उपयोग कर सामाजिक कार्यकर्ता प्राकृतिक सम्पदा का अभिलेखन कर रहे हैं।
डांगे जी राजीव गाँधी विज्ञान तंत्रज्ञान आयोग (महाराष्ट्र राज्य) के सदस्य थे। वर्तमान में National Rural Livelihood Promotion Society (NRLPS), ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार के सदस्य है। G 20 देशो की भारत की अध्यक्षता (2023) के दौरान वह Civil 20 LiFE Working Group के राष्ट्रीय समन्वयक है।
योजक टीम
श्री भगवती प्रसाद मुंदड़ा – जलगाँव, महाराष्ट्र के निवासी श्री. भगवती प्रसाद मुंडदा जी मूलतया एक उद्यमी हैं किंतु पिछले ३० वर्षो से विभिन्न सामाजिक कार्यों में उनका न तो केवल सक्रिय सहभाग है अपितु वे स्वयं एक जेष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं।
श्री उदय लातूरे – श्री. उदय लातूरे जी पुणे, महाराष्ट्र के एक विख्यात सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वे स्वयं एक उद्यमी हैं तथा ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योजकता विकास के लिए विशेष प्रयासरत भी हैं।
श्री तुलसीभाई मावाणी – सूरत, गुजरात के निवासी तथा डॉ आंबेडकर वनवासी कल्याण ट्रस्ट, सूरत, गुजरात के अध्यक्ष श्री. तुलसीभाई मावणी जी स्वयं एक उद्यमी हैं। वे गिर्यारोहण में विशेष रूचि रखते हैं।
श्री कपिल सहस्रबुद्धे – पुणे, महाराष्ट्र के निवासी। गत दो दशको से पर्यावरण संरक्षण, जैवविविधता संवर्धन आदी विषयो में राष्ट्रीय, आंतरराष्ट्रीय संस्थाओ के साथ कार्यरत है ।