योजक और नाबार्ड के संयुक्त तत्वावधान में गुजरात के जनजातीय समुदायों को सशक्त बनाना- सतत आजीविका- भविष्य की राहे इस एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन डाॅ आंबेडकर ट्रस्ट, सुरत में किया गया था। इस कार्यशाला में जनजातीय सांसद, गुजरात में कार्यरत २० से अधिक स्वयंसेवी संस्थाएँ, महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, वीर नर्मद विश्वविद्यालय तथा सरदार पटेल राष्ट्रीय तकनीकी संस्थान, सामाजिक कार्यकर्ता, बॅंकर्स सम्मिलित हुए थे। कार्यशाला में जनजातीय समुदायों की आजीविका स्थिती, उस बारे में हो रहे कार्य, बदलती परिस्थिती में उभर रहे नये प्रश्न तथा संभावनाओं के बारे में सघन चर्चा हुई। इस प्रकार आजीविका संबंधी सभी हितग्राहियो को साथ लाने का यह अनोखा प्रयास था।
नाबार्ड के चेअरमन श्री शाजी ने इसका उद्घाटन किया। इस अवसर पर श्री धवल पटेल और श्री प्रभूभाई वसावा लोकसभा सांसद, श्रीमती रमिलाबेन बारा तथा श्री गोविंदभाई ढोलकिया राज्यसभा सांसद , श्री मनोहरजी पाडवी, चेअरमन ( ऑफिशिएटींग) ICSSR, डाॅ गजानन डांगे, राष्ट्रीय अध्यक्ष, योजक , श्री सिंघल, नाबार्ड गुजरात सीजीएम तथा श्री तुलसीभाई मावाणीजी , अध्यक्ष आंबेडकर ट्रस्ट उपस्थित थे।
मा. सांसदों ने अपने कार्यक्षेत्र मे आजीविका संबंधित विषयों को रखा। शिक्षा विदो तथा स्वयंसेवी संस्थानों ने आजीविका से जुडे अध्ययन तथा आजीविका प्रश्नों को दूर करने हेसू विभिन्न प्रयोगो तथा संभावनाओ को प्रस्तुत किया। कार्यशाला से उभरे अनुभव को साझा करते हुए डाॅ डांगेने विशेष सीड झोन केलरूप में जनजातीय क्षेत्रे के विकास की जरूरत को सबके सम्मुख रखा तथा विभिन्न नितीगत विषयो पर विशेष सहभागीय अध्ययन पर बल दिया। इसके समारोपीय भाषण में चेअरमन नाबार्ड ने जनजातीय समुदायो के सशक्तीकरण हेतू नाबार्ड की वचनबद्धता को दोहराया।
इस अवसर पर नाबार्ड से जुडी अन्यान्य संस्थाओ , कृषक उत्पादक कंपनियो ने अपने उत्पादनों को प्रदर्शनी द्वारा प्रस्तुत किया ।



